Police Force Shortage in Jharkhand: झारखंड में पुलिस बल की लगातार कमी

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में कनीय पुलिस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की गति तेजी से बढ़ रही है, जिससे राज्य में पुलिस बल की कमी होती जा रही है। हाल ही में, 31
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में कनीय पुलिस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की गति तेजी से बढ़ रही है, जिससे राज्य में पुलिस बल की कमी होती जा रही है। हाल ही में, 31 जुलाई तक 35 अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिनमें 12 डीएसपी और 23 पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि जिस अनुपात में सेवानिवृत्तियां हो रही हैं, उसी अनुपात में नई बहाली नहीं हो रही है। विशेष रूप से, 1994 बैच के संयुक्त बिहार में दारोगा के पद पर बहाल अधिकारियों की स्थिति को देखें तो इस वर्ष एक जनवरी से 31 जुलाई के बीच 31 अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस प्रकार, डीएसपी और इंस्पेक्टर के पदों में कमी आई है, जो कि पुलिस बल की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है।
इस वर्ष के अंत तक और दर्जनभर अधिकारी सेवानिवृत्त होने की संभावना है, जिससे पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति और भी खराब हो जाएगी। वर्तमान में, पेट्रोलिंग वाहनों में केवल एक कनीय पुलिस पदाधिकारी और एक या दो जवान ही रह जाते हैं, जबकि इन वाहनों में चालक के अलावा चार जवानों का होना आवश्यक है। इस कमी के कारण पुलिस गश्त पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अपराध पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। पुलिसकर्मियों को 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है और उन्हें साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल पा रहा है।
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है और मुख्यमंत्री से बल की कमी को दूर करने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू और महामंत्री संजीव कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी तदाशा मिश्रा को पत्र लिखकर इस स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने जमशेदपुर के डीडी बार में युवक की हत्या का उदाहरण देते हुए बताया कि पुलिस गश्ती वाहन में पर्याप्त बल नहीं होने के कारण यह घटना घटी। यदि बल पर्याप्त होता, तो अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता था। इस प्रकार, झारखंड में पुलिस बल की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसे तत्काल समाधान की आवश्यकता है।
















