Sugarcane harvesting in Bijnor: बिजनौर में कटेगा मशीन से गन्ना, छिलाई होगी साफ-सुथरी... अगोला भी मिलेगा कहीं ज्यादा

बिजनौर में गन्ने की कटाई और छिलाई के लिए तीन मिनी हार्वेस्टर मशीनों की खरीद की गई है। यह कदम खेतों में श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। इन मशीनो
बिजनौर में गन्ने की कटाई और छिलाई के लिए तीन मिनी हार्वेस्टर मशीनों की खरीद की गई है। यह कदम खेतों में श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। इन मशीनों का उपयोग ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने की कटाई के लिए किया जाएगा। प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग 10 लाख रुपये है और पिछले वर्ष इनका सफल परीक्षण किया गया था। बिजनौर चीनी मिल के सहायक महाप्रबंधक मोनी शर्मा ने बताया कि किसानों से न्यूनतम शुल्क पर गन्ने की कटाई और छिलाई की जाएगी। वर्तमान में, मजदूरों की कमी के कारण किसान गन्ने और गेहूं की खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं, जिससे जिले में गन्ने का रकबा पिछले दो वर्षों में लगभग 13 हजार हेक्टेयर तक घट गया है। इस स्थिति को देखते हुए, चीनी मिलें किसानों को गन्ने की खेती से जोड़े रखने के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान भी दे रही हैं। अब मिनी केन हार्वेस्टर मशीनों की खरीद से गन्ने की कटाई और छिलाई की प्रक्रिया को और भी सरल और सस्ती बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिजनौर चीनी मिल ने तीन मिनी केन हार्वेस्टर मशीनें खरीदी हैं, जो गन्ने की छिलाई के लिए श्रमिकों की तुलना में अधिक कुशलता से काम करेंगी। खेतों में श्रमिक फरवरी तक गन्ने की छिलाई के लिए 40 से 50 रुपये प्रति कुंतल और उसके बाद 70 रुपये प्रति कुंतल तक लेते हैं। यदि किसान 100 कुंतल गन्ने की छिलाई कराते हैं, तो उन्हें लगभग सात हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, मिनी केन हार्वेस्टर से गन्ने की छिलाई की लागत 50 से 60 रुपये प्रति कुंतल तक रह जाएगी। मशीन गन्ने को काटने, अंगोला काटने और गन्ना छीलने का कार्य करेगी, जबकि गन्ना ट्राली या बुग्गी में भरने का काम मिल के श्रमिक करेंगे। इससे किसानों को गन्ने की छिलाई पर खर्च में काफी कमी आएगी।
















