Political Violence in PoK: रावलकोट में चुनाव के बीच हिंसा पर उठे सवाल

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में क्षेत्रीय चुनावों के दौरान हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रावलकोट और उसके आसपास के क्षेत्र
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में क्षेत्रीय चुनावों के दौरान हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रावलकोट और उसके आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार को सुरक्षा बलों और प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें जारी रहीं। पिछले कई दिनों से चल रही हिंसा में कई लोगों के हताहत होने की खबरें आ रही हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं की जाएगी और कार्रवाई जारी रहेगी। मानवाधिकार संगठनों ने पीओजेके के हालात पर गहरी चिंता जताई है। जेएएसी पिछले करीब दो महीनों से पीओजेके की 12 विवादित विधानसभा सीटों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का आरोप है कि ये शरणार्थी निर्वाचन क्षेत्र उन मतदाताओं को जरूरत से ज़्यादा महत्व देते हैं जो वहां के निवासी नहीं हैं और जिनकी पहचान की पुष्टि भी ज्यादातर नहीं हुई है। इसके अलावा, स्थानीय मुद्दों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।
भारत ने इन चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी क्षेत्र, जिनमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पीओजेके में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं। एएनआइ के अनुसार, रावलकोट और मीरपुर में सोमवार से हिंसा की घटनाएं सबसे अधिक देखी गई हैं। जेएएसी का दावा है कि अब तक कम से कम 37 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं है।
















