Railway Food Waste Issue Raised in Rajya Sabha: सांसद रेखा शर्मा ने बचे हुए खाने के सही उपयोग की बात की

राज्यसभा में भाजपा की सदस्य रेखा शर्मा ने बृहस्पतिवार को शून्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था में प्रतिदिन बचे हुए भोजन के सही उपयोग का मुद्दा उठाय
राज्यसभा में भाजपा की सदस्य रेखा शर्मा ने बृहस्पतिवार को शून्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था में प्रतिदिन बचे हुए भोजन के सही उपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल प्रतिदिन लाखों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है, लेकिन कई बार भोजन की मांग के अनुसार अधिक मात्रा में भोजन तैयार किया जाता है, जिसके कारण काफी खाना बर्बाद हो जाता है। यह बर्बाद हुआ खाना अंततः कूड़ेदान में चला जाता है, जो कि एक गंभीर समस्या है। रेखा शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि यदि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए तो इस अतिरिक्त भोजन को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का एक सुव्यवस्थित तरीका अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों, सफाई कर्मचारियों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों के लिए इस भोजन का वितरण किया जा सकता है। इसके लिए एक प्रभावी तंत्र या पायलट परियोजना की आवश्यकता है।
सांसद रेखा शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि भारतीय रेलवे में बचे हुए भोजन के संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण और वितरण के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्य में मान्यता प्राप्त फूड बैंक, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जा सकता है। यह पहल न केवल खाद्य अपव्यय को कम करेगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंद लोगों की मदद करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। रेखा शर्मा ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल बचे हुए भोजन का सही उपयोग होगा, बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का भी काम करेगी।
इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए रेखा शर्मा ने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कई अन्य देशों में इस तरह की सफल योजनाएं लागू की गई हैं, जहां बचे हुए भोजन का सही उपयोग किया जाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारतीय रेलवे भी इस दिशा में आगे बढ़ेगा और जरूरतमंदों की मदद के लिए एक प्रभावी योजना तैयार करेगा। इस प्रकार, रेलवे में भोजन बर्बादी का मुद्दा केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
















