Regional Leaders Silent Amidst Youth Uprisings: क्षेत्रीय नेताओं की चुप्पी, युवाओं के आंदोलनों के बीच सवाल उठते हैं

फैज अहमद फैज का शेर 'बोल कि लब आजाद हैं तेरे' आज के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। चिराग पासवान, चंद्रबाबू नायडू, जयंत चौधरी, अनुप्रिया पटेल और सायोनी घोष जैसे
फैज अहमद फैज का शेर 'बोल कि लब आजाद हैं तेरे' आज के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। चिराग पासवान, चंद्रबाबू नायडू, जयंत चौधरी, अनुप्रिया पटेल और सायोनी घोष जैसे क्षेत्रीय नेताओं के लिए यह सवाल उठता है कि क्या वे युवाओं के समर्थन की आवश्यकता नहीं समझते? हाल ही में, दिल्ली से शुरू हुआ विद्यार्थियों का आंदोलन झारखंड में अपने चरम पर है, जहां जनता ने 'कुत्ता-बिल्ली' जैसे विमर्श को अस्वीकार कर दिया है। हेमंत सोरेन को इस संकट से निपटने के लिए संवाद करना होगा।
अमेरिका में विद्यार्थियों का आंदोलन भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहा है। वहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों की मांगों को महत्वहीन बताया, जिससे विद्रोह का माहौल बन गया। 1968 के छात्र आंदोलन से प्रेरित फिल्म 'द स्ट्राबेरी स्टेटमेंट' ने भी इसी संघर्ष को दर्शाया था। जब सत्ता सुनना बंद कर देती है, तो विरोध तेज हो जाता है। बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत किशोर ने जनता से कहा कि भाजपा के प्रत्याशी को हराना होगा, ताकि मोदी जी को बिहार के मुख्यमंत्री के चुनाव में हुई गलती का एहसास हो।















