Violence in Sambhal: सियासी दुश्मनी और भड़काऊ बयानों ने बढ़ाई हिंसा

उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा को लेकर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है
उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा को लेकर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे की पृष्ठभूमि पहले से तैयार की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, तुर्क और पठानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, भड़काऊ बयानबाजी और भीड़ में शामिल आपराधिक तत्वों ने इस पूरे घटनाक्रम को हिंसक बना दिया। आयोग ने यह भी बताया कि हिंसा में मारे गए चार लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई थी, जो कि एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में संभल के सांसद जियाउर रहमान बर्क, शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल को हिंसा की साजिश रचने और लोगों को भड़काने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लोगों ने मस्जिद के सर्वे का विरोध करने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को मस्जिद की सुरक्षा के नाम पर इकट्ठा होने का आह्वान किया था। इससे इलाके में तनाव बढ़ता चला गया। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों के बीच यह संदेश फैलाया गया कि मस्जिद खतरे में है और इसे अयोध्या की तरह उनसे छीन लिया जाएगा। ऐसे भड़काऊ बयानों ने मुस्लिम समुदाय में गुस्सा और असुरक्षा की भावना पैदा की।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 19 नवंबर 2024 को कोर्ट की ओर से सर्वे की कार्रवाई अधूरी रहने के बाद से ही हिंसा की योजना बनाई जाने लगी थी। इसके बाद सांसद जियाउर रहमान बर्क के नाम से संचालित एक व्हाट्सएप ग्रुप में लोगों से शाही मस्जिद में नमाज अदा करने की अपील की गई। इस तरह की बयानबाजी और सोशल मीडिया का उपयोग भीड़ जुटाने के लिए किया गया। आयोग ने यह भी बताया कि हिंसक भीड़ ने पुलिस और प्रशासन को निशाना बनाया और पुलिसकर्मियों पर हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा में 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला है कि संभल हिंसा में जान गंवाने वाले चार लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई, जो कि इस मामले में एक महत्वपूर्ण जानकारी है। राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई और तुर्क और पठान समुदायों के बीच संघर्ष ने भी इस हिंसा को भड़काने में अहम भूमिका निभाई।

















