Strengthening Air Ambulance Network: हरियाणा सरकार 5 नए मेडिकल कॉलेज बनाएगी केंद्र

हरियाणा सरकार ने एयर मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में गंभीर मरीजों, सड़क दुर्घटना पीड़ितों और अंग प्रत्यारोपण ज
हरियाणा सरकार ने एयर मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में गंभीर मरीजों, सड़क दुर्घटना पीड़ितों और अंग प्रत्यारोपण जैसे समय-संवेदनशील मामलों में इलाज की गति बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों को हेलीकाप्टर आधारित एयर एंबुलेंस नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। हरियाणा एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एचएडीसी) की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस बैठक की अध्यक्षता हरियाणा के नागर विमानन मंत्री विपुल गोयल ने की, जिसमें निर्णय लिया गया कि पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक (पीजीआइ), करनाल और सोनीपत के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हेलीपैड विकसित अथवा उन्नत किए जाएंगे। इन केंद्रों से हेलीकाप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (एचइएमएस) संचालित की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों या सड़क दुर्घटना पीड़ितों के उपचार में गोल्डन आवर का समय व्यर्थ न जाए। इस दिशा में एयर एंबुलेंस के लिए एक मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे हरियाणा आधुनिक और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ सके।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मंजूरी मिलने के बाद नागर विमानन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे डीजीसीए की मंजूरियों, तकनीकी परीक्षण, सर्वेक्षण और अन्य औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें ताकि परियोजना को जल्द शुरू किया जा सके। देश में एयर एंबुलेंस सेवा का महत्व लगातार बढ़ रहा है, और गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और दिल्ली-एनसीआर जैसे राज्यों में इस सेवा का विस्तार किया गया है। हरियाणा की यह पहल उत्तर भारत में एयर मेडिकल इमरजेंसी नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय कई बार मरीज की जान पर भारी पड़ सकता है, और एयर एंबुलेंस व्यवस्था से दूरदराज या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से मरीजों को कम समय में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा।
सड़क दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर जलने के मामलों और नवजात शिशुओं की आपात चिकित्सा में एयर एंबुलेंस सेवा बेहद उपयोगी साबित होगी। अंग प्रत्यारोपण के लिए ग्रीन कारिडोर बनाने में भी हेलीकाप्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे अंग निर्धारित समय सीमा के भीतर अस्पताल तक पहुंचाए जा सकते हैं। विपुल गोयल के अनुसार, विकसित किए जाने वाले हेलीपैड केवल एयर एंबुलेंस तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं, राहत एवं बचाव अभियानों, हेलीकाप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस और अन्य आपात स्थितियों में भी किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन में एचएडीसी, सिविल विमानन विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे। यह पहल हरियाणा की स्वास्थ्य अवसंरचना को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य में क्षेत्रीय एयर मेडिकल नेटवर्क विकसित करने की मजबूत नींव भी साबित हो सकती है।


















