Suicide in Surat: दोस्तों ने किया धोखा, एक व्यवसायी ने दी जान

सूरत के सरथाणा क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक कढ़ाई व्यवसायी को उसके तीन दोस्तों ने आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। यह घटना न केवल दोस्ती के रिश्
सूरत के सरथाणा क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक कढ़ाई व्यवसायी को उसके तीन दोस्तों ने आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। यह घटना न केवल दोस्ती के रिश्ते को कलंकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे आर्थिक दबाव और धोखाधड़ी किसी व्यक्ति को आत्महत्या की ओर ले जा सकती है। राजेशभाई कुंजड़िया, जो मूल रूप से जूनागढ़ के विसावदर के निवासी थे, ने 30 जुलाई को जहरीली दवा पीकर अपनी जान दे दी। उनकी मौत के पीछे की कहानी बेहद दर्दनाक है, जिसमें उनके दोस्तों ने उन्हें धोखा दिया और आर्थिक संकट में डाल दिया। राजेशभाई ने अपनी एम्ब्रॉयडरी मशीनें बेचकर 14 लाख रुपये जुटाए थे, लेकिन उनके दोस्तों ने उन्हें धोखा देकर यह पैसे हड़प लिए। घनश्याम अहीर, निक्षित उर्फ रिकी और दाढ़ी अहीर ने मिलकर राजेशभाई से कुल 17.32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। जब राजेशभाई ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घनश्याम ने राजेशभाई के नाम पर कई बैंकों में फर्जी खाते खोलकर उन्हें और भी मुश्किल में डाल दिया। राजेशभाई को यह एहसास हुआ कि वे एक जाल में फंस गए हैं, और जब उन्होंने विरोध किया, तो घनश्याम ने उन्हें साइबर क्राइम में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने उन्हें यह भी कहा कि अगर पैसे नहीं हैं, तो उन्हें मर जाना चाहिए। इस प्रकार की धमकियों से तंग आकर राजेशभाई ने एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और दोस्तों के विश्वासघात का जिक्र किया। यह नोट उनके मोपेड में छिपा हुआ मिला, जिससे पुलिस को इस मामले की गंभीरता का पता चला।
राजेशभाई की पत्नी भाविकाबेन और दो छोटे बच्चे अब अपने पिता के बिना रह गए हैं। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए एक बड़ा आघात है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि कैसे दोस्ती के नाम पर धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना किसी की जान ले सकती है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपने आस-पास के लोगों की भावनाओं और समस्याओं का ध्यान रखना चाहिए, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।
















