Supreme Court's Directive: फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार

भारत की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में पैदल चलने वालों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दि
भारत की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में पैदल चलने वालों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि देश की हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए एक सुरक्षित, स्पष्ट और अतिक्रमण-मुक्त स्थान सुनिश्चित किया जाए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि सड़क पर पैदल चलने के लिए उचित स्थान होना चाहिए, जिसे वाहनों की लेन से अलग रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि फुटपाथ का निर्माण किया जाना चाहिए और इसे किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे से मुक्त रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी बताया कि इसके लिए भारी निवेश या बड़े निर्माण कार्य की आवश्यकता नहीं है, बल्कि साधारण बैरिकेडिंग या सीमांकन से ही यह संभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया है ताकि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा सके कि पैदल चलने के लिए निर्धारित मार्ग पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो। कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने वालों को यह विश्वास होना चाहिए कि यह स्थान केवल उनके लिए सुरक्षित है और वे बिना किसी डर के चल सकते हैं। यह मामला एक दुखद सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें एक पिता ने अपने पांच साल के बेटे को खो दिया था। इस घटना के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया कि फुटपाथ पर चलने का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) और अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पैदल चलने का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही से अधिक प्राथमिक है। अदालत ने प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बताई कि जहां सड़क है, वहां सुरक्षित फुटपाथ मुहैया कराना आवश्यक है। शहरी विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों और पंचायतों को इस कर्तव्य को निभाना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि पैदल चलने के अधिकार का उल्लंघन होता है, तो नागरिक मुआवजे और कानूनी उपायों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यह निर्णय देश के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
















