Taslima Nasrin criticizes madrasas: तसलीमा नसरीन ने मदरसों को बताया जिहादी तैयार करने की फैक्ट्री, UCC का किया समर्थन

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने हाल ही में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कई मदरसे अब जिहादी तैयार कर
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने हाल ही में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कई मदरसे अब जिहादी तैयार करने की फैक्ट्रियों में बदल गए हैं। उनके अनुसार, इन संस्थानों में बच्चों के साथ उत्पीड़न और यौन शोषण की घटनाएं भी सामने आती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इनकी शिक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं। तसलीमा ने सुझाव दिया कि सभी मदरसों को सरकारी नियंत्रण में लाकर धर्मनिरपेक्ष स्कूलों में परिवर्तित किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को एक सुरक्षित और समावेशी शिक्षा मिल सके। तसलीमा ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है, जो बच्चों में कट्टरता और दूसरे धर्मों के प्रति घृणा पैदा करे। उनके इस बयान ने मदरसों की शिक्षा प्रणाली पर एक बार फिर से गंभीर सवाल उठाए हैं।
तसलीमा ने आगे कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के कई मदरसों पर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश मदरसों पर प्रभावी सरकारी निगरानी नहीं होती और वहां कम उम्र से ही गैर-मुस्लिमों के प्रति नफरत का माहौल बनाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण विभिन्न सरकारें कट्टरपंथी तत्वों से समझौता करती रही हैं, जिसका नतीजा समाज को भुगतना पड़ रहा है। तसलीमा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए कहा कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान, तीनों देशों में यूसीसी लागू होना चाहिए। उनका मानना है कि 'एक देश, एक कानून' और सभी नागरिकों के लिए समान कानून ही आधुनिक लोकतंत्र की पहचान है।
















