Tragic Death of Aban: झांसी जेल में अली अहमद ने छोटे भाई की मौत पर फूट-फूटकर रोया

झांसी/प्रयागराज: माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत ने झांसी जेल में बंद उसके बड़े भाई अली अहमद को पूरी तरह तोड़ दिया है। भाई
झांसी/प्रयागराज: माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत ने झांसी जेल में बंद उसके बड़े भाई अली अहमद को पूरी तरह तोड़ दिया है। भाई के गुजर जाने की सूचना मिलते ही अली रोने लगा और बेसुध हो गया। वह बार-बार यही दोहराता रहा कि 'अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया।' इस हादसे के बाद से अली गहरा सदमा में है। उसने पिछले दो दिनों से न तो खाना खाया है और न ही सोया है।
आबान ने झांसी जेल पहुंचने से पहले एक दरोगा को फोन पर कहा था, 'मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई।' इसके कुछ मिनटों बाद ही पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में उसकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई और आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
जब जेल अधिकारियों ने अली को हादसे की जानकारी दी, तो उसकी चीख निकल गई। रोज सुबह एक्सरसाइज करने वाला अली खुद को कोठरी के भीतर बंद किए रहा और रातभर करवटें बदल-बदलकर रोता रहा। जेल सूत्रों के अनुसार, अली अपने छोटे भाई आबान को बहुत चाहता था। आबान हर महीने 3-4 बार उससे मिलने झांसी जेल आता था। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक-दूसरे से गले मिलते थे। आबान जब भी आता, अपने भाई के लिए किताबें लाता था। पुलिस को दुर्घटनाग्रस्त कार के मलबे से दो किताबें भी बरामद हुई हैं।
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े। अली ने रोते हुए जज से प्रार्थना की कि उसे भाई के जनाजे में जाने दिया जाए। हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है। कोर्ट के आदेशानुसार, अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज के कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे एक घंटे तक अंतिम क्रियाक्रम में शामिल हो सकेंगे।
















