UPI Transaction Charges: 2000 रुपये से अधिक पर लागू होगा MDR

वित्त मंत्रालय ने हाल ही में संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है, जिसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (mdr) लागू करने की बात की गई ह
वित्त मंत्रालय ने हाल ही में संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है, जिसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की बात की गई है। यह चार्ज 2000 रुपये से अधिक की यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू किया जा सकता है। इस विधेयक के पेश होने के बाद से ही विपक्ष ने मोदी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह चार्ज सभी यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा, जिससे ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर स्पष्टता प्रदान करते हुए कहा है कि MDR चार्ज केवल व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए।
वित्त मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि MDR लागू किया जाता है, तो इसका असर केवल व्यापारियों पर होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ यूपीआई के सभी उपयोगकर्ताओं को मिलेगा। वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह चार्ज ग्राहकों को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि MDR का शुल्क डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन को संसाधित करने के लिए व्यापारियों द्वारा बैंकों और अन्य मध्यस्थों को भुगतान किया जाने वाला शुल्क है।
निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि एनपीसीआई (NPCI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने अभी तक MDR पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। यह निर्णय संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद ही होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं या छोटे व्यापारियों को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने पर जोर दिया गया है। छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन और व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई पेमेंट को इस प्रस्तावित ढांचे से बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा, MDR को फिर से लागू करने पर पिछले दो सालों से चर्चाएं चल रही हैं।















