Financial Crisis in Jamshedpur FC: जमशेदपुर एफसी के बंद होने की वित्तीय कहानी

जमशेदपुर एफसी (jfc) के अचानक बंद होने के निर्णय ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। यह निर्णय टाटा स्टील द्वारा लिया गया है, जो कि क्लब के लंबे समय से वित्तीय संकट म
जमशेदपुर एफसी (JFC) के अचानक बंद होने के निर्णय ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। यह निर्णय टाटा स्टील द्वारा लिया गया है, जो कि क्लब के लंबे समय से वित्तीय संकट में होने की पुष्टि करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि क्लब का नेटवर्थ माइनस 46.61 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस रिपोर्ट में ऑडिटर ने कंपनी के अस्तित्व को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी, जिसमें कहा गया था कि लगातार हो रहे आपरेटिंग घाटे और नकारात्मक नेटवर्थ के कारण क्लब के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। 2024-25 में क्लब को 6.56 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जो 2025-26 में भी 4.40 करोड़ रुपये बना रहा। ऐसे में टाटा स्टील के लिए इस घाटे की भरपाई करना मुश्किल हो रहा था। क्लब की कमाई के साधनों की कमी ने प्रबंधन को इस कठोर निर्णय पर मजबूर कर दिया।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, जमशेदपुर एफसी के कुल राजस्व में एक साल के भीतर लगभग 23 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। 2024-25 में क्लब का कुल राजस्व 54.36 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में घटकर 31.95 करोड़ रुपये रह गया। सबसे बड़ा झटका आईएसएल सेंट्रल राइट्स से मिलने वाली आय में लगा, जो 2024-25 में 21.24 करोड़ रुपये थी, लेकिन 2025-26 में यह घटकर मात्र 32.37 लाख रुपये रह गई। इस गिरावट ने क्लब के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके अलावा, मैच टिकटों और स्पॉन्सरशिप से भी निराशाजनक परिणाम सामने आए हैं। 2024-25 में मैच टिकटों से 55 लाख रुपये की कमाई हुई थी, जो 2025-26 में घटकर 21.49 लाख रुपये रह गई। स्पॉन्सरशिप से होने वाली आय भी 29.97 करोड़ से घटकर 26.80 करोड़ रुपये रह गई।
















