Gold Medalist Sharmila Dhankar: गोल्ड मेडलिस्ट शर्मिला धनखड़ का सफर और कोच टेकचंद की भूमिका

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर, पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने गुरु टेकचंद को एक अनमोल उपहार दिया है। यह दिन न केवल शर्मिला क
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर, पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने गुरु टेकचंद को एक अनमोल उपहार दिया है। यह दिन न केवल शर्मिला के लिए, बल्कि उनके गुरु के लिए भी गर्व का क्षण है। टेकचंद ने बताया कि शर्मिला ने जिस तरह से खेल के प्रति समर्पण और अनुशासन दिखाया है, वह अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि शर्मिला ने खेल की बारीकियों को बहुत जल्दी समझा और अपनी कमजोरियों को सुधारने में भी सक्षम रहीं। टेकचंद का मानना है कि शर्मिला ने वह मुकाम हासिल किया है, जो उन्होंने अपने करियर में नहीं पाया। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
शर्मिला का खेल का सफर आसान नहीं रहा है। लगभग दो साल से वह सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधीकरण में प्रशिक्षण ले रही हैं। इससे पहले, उन्होंने रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में अभ्यास किया। एक सड़क दुर्घटना के बाद जब टेकचंद ने शारीरिक दिव्यांगता का सामना किया, तब उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खेलों में अपनी पहचान बनाई। शर्मिला ने जब टेकचंद को व्हीलचेयर पर खेलते हुए देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि अगर वह इस स्थिति में भी सफल हो सकते हैं, तो वह भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। इस प्रेरणा के साथ, उन्होंने टेकचंद को अपना गुरु मानते हुए उनके साथ अभ्यास करना शुरू किया।
















