Use of AI in 'Chalo Sansad' Protest: प्रदर्शन में पुलिस से निपटने के लिए मांगी गई मदद

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने गुरुवार को जानकारी दी कि सीजेपी द्वारा आयोजित 'चलो संसद' प्रदर्शन में 20 जुलाई को हुई झड़पों की जांच जारी है। इस जांच में यह सामने आय
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने गुरुवार को जानकारी दी कि सीजेपी द्वारा आयोजित 'चलो संसद' प्रदर्शन में 20 जुलाई को हुई झड़पों की जांच जारी है। इस जांच में यह सामने आया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के भीड़-नियंत्रण उपायों का मुकाबला करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरणों का उपयोग किया। इसमें आंसू गैस के प्रभाव को कम करने के लिए गीले जूट के बैग का उपयोग करने का मामला भी शामिल है। पुलिस इस मामले की जांच कई तरीकों से कर रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने हार्ड हैट, मास्क और चश्मे पहनकर खुद को तैयार किया था। जांच से यह संकेत मिला है कि कुछ प्रतिभागियों ने आंसू गैस के प्रभाव को कम करने और सुरक्षाकर्मियों से टकराव की तैयारी के लिए एआई प्लेटफार्मों पर जानकारी खोजी होगी। पुलिस इस मामले में डिजिटल और अन्य सबूत इकट्ठा कर रही है। हालांकि, पुलिस ने उन एआई प्लेटफार्मों के नाम नहीं बताए हैं जिन तक कथित तौर पर पहुंचा गया था। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या किसी डिजिटल उपकरण की फॉरेंसिक जांच की गई है। 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। ये झड़पें संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और जंतर मंतर सहित कई स्थानों पर हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया था। इस दौरान पथराव की कई घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का बार-बार इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि झड़पों में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 65 से अधिक प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। हिंसा के दौरान पुलिस वाहनों सहित 15 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। एआई रणनीति और उपकरणों के संदर्भ में पुलिस हार्ड हैट, फेस मास्क और सुरक्षात्मक चश्मे के वितरण की भी जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि ये सामान प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान वितरित किए गए थे, ताकि प्रतिभागियों को हिंसा के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करने में मदद मिल सके। पुलिस का मानना है कि प्रदर्शनकारियों ने आंसू गैस के प्रभाव को तुरंत कम करने के तरीके खोजे थे, जिसमें गीले जूट के बैग का उपयोग भी शामिल था। इस जांच का दायरा और प्रगति को देखते हुए, जांचकर्ताओं ने 2,800 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की है जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है और जो प्रदर्शन के दौरान मौजूद थे। उनकी भूमिका और संलिप्तता के स्तर की जांच की जा रही है। पुलिस की कई टीमें वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक सबूत का विश्लेषण कर रही हैं। इसका उद्देश्य घटनाओं के क्रम को स्थापित करना और हिंसा की योजना बनाने या उसमें भाग लेने वालों की पहचान करना है। इस पूरे मामले की जांच कई कोणों से की जा रही है।



















