Aviation Sector Boom: देश में खुलेंगे 11 नए फ्लाइंग स्कूल, 30 हजार पायलटों की आवश्यकता

भारत में पायलटों की कमी को दूर करने के लिए और विदेशी फ्लाइंग स्कूलों पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (aai) ने एक महत्वपूर्ण कद
भारत में पायलटों की कमी को दूर करने के लिए और विदेशी फ्लाइंग स्कूलों पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए ई-टेंडर के तहत, 7 एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) के लिए टेंडर प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। AAI के अनुसार, तकनीकी बोलियां 30 अप्रैल 2026 को और वित्तीय बोलियां 22 मई 2026 को खोली जाएंगी। यह प्रक्रिया सभी साइट्स के लिए सफल रही है, जो कि देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में भारत को 30 हजार से 31 हजार 800 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी। इस वृद्धि के पीछे एयरलाइंस द्वारा अगले 5 वर्षों में 500 नए विमानों को जोड़ने और 50 नए एयरपोर्ट्स के निर्माण की योजना है। वर्तमान में, अप्रैल 2026 तक देश में केवल 41 DGCA-मंजूर FTO 63 फ्लाइंग बेस से काम कर रहे थे। AAI ने चेतावनी दी है कि यदि क्षमता में वृद्धि नहीं की गई, तो बढ़ती मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।
AAI ने पहले ही 2021 में 5 एयरपोर्ट्स पर 9 और 2022 में 5 एयरपोर्ट्स पर 6 FTO स्लॉट दिए थे। इसके अलावा, 20 एयरपोर्ट्स पर 25 साल के लिए जमीन भी मंजूर की गई है। सरकार को उम्मीद है कि ये नए FTO पायलट बनने के इच्छुक युवाओं के लिए एक आसान और किफायती विकल्प प्रदान करेंगे, जिससे भारत को एविएशन ट्रेनिंग का एक वैश्विक केंद्र बनाने में मदद मिलेगी। इस पहल से न केवल पायलटों की कमी को दूर किया जाएगा, बल्कि यह देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को भी मजबूती प्रदान करेगा। (न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)



















