Bhadohi emerges as a growth engine: भदोही बना पूर्वांचल का नया 'ग्रोथ इंजन'

भदोही, जिसे 'कालीन नगरी' के नाम से जाना जाता है, अब केवल पारंपरिक हस्तशिल्प का केंद्र नहीं रह गया है। यह जिला आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ai) और बेहतरीन
भदोही, जिसे 'कालीन नगरी' के नाम से जाना जाता है, अब केवल पारंपरिक हस्तशिल्प का केंद्र नहीं रह गया है। यह जिला आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ आध्यात्मिक पर्यटन का एक नया केंद्र बनकर उभरा है। भदोही ने पिछले कुछ वर्षों में एक सुरक्षित और आकर्षक व्यापारिक माहौल तैयार किया है, जो पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यहाँ की लगभग 850 उत्पादन इकाइयाँ, 600 से अधिक निर्यातक और 3 लाख से अधिक बुनकरों का हुनर अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व सहित दुनिया के कई देशों में अपनी पहचान बना चुका है। 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत इस उद्योग को नई दिशा मिली है, जिसमें पारंपरिक बुनाई के साथ-साथ AI और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर कालीन डिजाइनिंग की जा रही है। भदोही में स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी' (IICT) पिछले 25 वर्षों से कुशल इंजीनियरों और कारीगरों को प्रशिक्षित कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांगों के अनुरूप हैं।
भदोही के कालीन उद्योग को बिचौलियों से मुक्त करने के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक 'कारपेट एक्सपो मार्ट' का निर्माण किया गया है। यह उत्तर भारत का पहला ऐसा बड़ा एक्सपो मार्ट है, जहाँ देश-विदेश के खरीदार सीधे आकर व्यापारिक सौदे कर सकते हैं। पहले निर्यातकों को प्रदर्शनी के लिए दिल्ली या बनारस जाना पड़ता था, लेकिन अब भदोही में ही अंतरराष्ट्रीय शो आयोजित हो रहे हैं। इस विश्वस्तरीय सुविधा के कारण भदोही ने निर्यात के मामले में पूर्वांचल में नंबर वन बनने के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश में पांचवें स्थान पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। भदोही की सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी उत्तम है, जहाँ फोरलेन सड़कों और विंध्य कॉरिडोर के माध्यम से आवागमन बेहद सुगम हो गया है। गंगा नदी पर बहुप्रतीक्षित डेंगरूपुर पुल के निर्माण ने प्रयागराज और भदोही के बीच की दूरी को कम कर दिया है।



















