Demand for Raigarh's Traditional 'Jawanphool' Rice: दिल्ली तक पहुंची मांग, किसानों की बढ़ी कमाई

रायगढ़ जिले का एक छोटा सा गांव, पाकरगांव, अपने अनोखे चावल की खेती के कारण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां के 'जवांफूल' चावल का स्वाद इतना लाजवाब है कि इ
रायगढ़ जिले का एक छोटा सा गांव, पाकरगांव, अपने अनोखे चावल की खेती के कारण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां के 'जवांफूल' चावल का स्वाद इतना लाजवाब है कि इसकी कीमत बाजार में 175 रुपये से लेकर 180 रुपये किलो तक पहुंच गई है। इस बढ़ती मांग ने किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। पाकरगांव के किसान, जिनमें सेवक राम नायक, बूंद राम नायक, निर्भय राम नायक, प्रदीप नायक और गणेश राम नायक शामिल हैं, मिलकर लगभग 10 एकड़ भूमि पर इस पारंपरिक चावल की खेती कर रहे हैं। ये किसान पीढ़ियों से इस चावल की किस्म को सहेजने के साथ-साथ इसकी मौलिकता और गुणवत्ता को भी बनाए रखे हुए हैं।
किसानों का कहना है कि जवांफूल धान की मांग हर वर्ष बढ़ रही है, जो इसकी बेहतरीन सुगंध, लाजवाब स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण है। यही कारण है कि आम धान की तुलना में यह किस्म उन्हें कई गुना अधिक मुनाफा दे रही है। पहले स्थानीय बाजारों में बिकने वाला यह चावल अब रायपुर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी लोकप्रिय हो चुका है। खास बात यह है कि इस चावल के प्रशंसक सीधे गांव आकर किसानों से खरीददारी कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि यह चावल बिना रसायनों के, प्राकृतिक विधि से तैयार किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता ग्राहकों के भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरती है।



















