Tomato Crop Spoiling in Uttarkashi: उचित दाम न मिलने से खेतों में सड़ रही टमाटर की 50 फीसदी फसल

उत्तरकाशी के बंदनौगांव में काश्तकारों की टमाटर की फसल को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मंडी में उचित दाम न मिलने के कारण रवांई घाटी के किसानों की 50 प्रतिशत से अध
उत्तरकाशी के बंदनौगांव में काश्तकारों की टमाटर की फसल को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मंडी में उचित दाम न मिलने के कारण रवांई घाटी के किसानों की 50 प्रतिशत से अधिक टमाटर की फसल खेतों में ही सड़ रही है। काश्तकारों का कहना है कि उन्हें सही दाम नहीं मिल रहा है और परिवहन के भारी खर्चे के कारण वे अपनी फसल को मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इस स्थिति के चलते उन्होंने फसल की तुड़ाई बंद कर दी है और खेतों में तैयार फसल को लावारिस छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। काश्तकारों ने सरकार से मांग की है कि टमाटर की फसल के लिए उचित समर्थन मूल्य और बाजार व्यवस्था की जाए। यह पहली बार है जब काश्तकारों को अपनी मेहनत से तैयार फसल को छोड़ना पड़ा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
रवांई घाटी में लगभग पचीस हजार मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है, जो क्षेत्र के काश्तकारों के लिए आजीविका का एक प्रमुख साधन है। टमाटर की फसल पर बीज, खाद, दवाई, मजदूरी, सिंचाई और ढुलाई पर भारी खर्च होता है। लेकिन मंडी में उचित दाम न मिलने के कारण काश्तकार अपनी फसल को मंडी तक पहुंचाने में असमर्थ हैं। इस कारण, वे खेतों में तैयार टमाटर की तुड़ाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में फसल खराब हो रही है। काश्तकार अजब सिंह, अमित रावत और हरिमोहन सिंह जैसे किसानों का कहना है कि कई काश्तकार तो अपनी फसल का तीस प्रतिशत भी मंडी नहीं भेज पाए हैं। मंडी में टमाटर के दाम गिरने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।



















