Ayodhya becomes new center for medical education: चिकित्सा की तीनों विधियों के महाविद्यालय से लैस हुई अयोध्या

अयोध्या, जो कि रामलला की जन्मभूमि के रूप में जानी जाती है, अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। इस धार्मिक नगरी में अब चिकित्सा
अयोध्या, जो कि रामलला की जन्मभूमि के रूप में जानी जाती है, अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। इस धार्मिक नगरी में अब चिकित्सा की तीनों प्रमुख विधियों के महाविद्यालय स्थापित हो चुके हैं, जिससे यह क्षेत्र चिकित्सा शिक्षा के लिए एक नई पहचान बना रहा है। डॉ. बृजकिशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, जो कि जिले का पहला चिकित्सा महाविद्यालय है, की स्थापना 1972 में डॉ. बृजकिशोर द्वारा की गई थी। प्रारंभ में इस महाविद्यालय का संचालन एक निजी संस्था द्वारा किया जाता था, लेकिन आपातकाल के दौरान इसे राज्य सरकार ने अपने अधिकार में ले लिया। इस महाविद्यालय में बीएचएमएस (बैचलर आफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई होती है। इसके अलावा, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्रित्व काल में जिले को दो और मेडिकल कॉलेज मिले हैं। 2019 में दर्शननगर में राजर्षि दशरथ चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हुई, जहां हार्ट और न्यूरो के सुपर स्पेशलिस्ट भी तैनात किए गए हैं। हालांकि, कैथलैब की कमी के कारण एंजियोग्राफी की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो सकी है। न्यूरो सर्जन के रूप में डॉ. विक्रांत यादव और डॉ. विकास द्विवेदी की नियुक्ति की गई है, जबकि न्यूरो फिजीशियन के पद पर डॉ. विमलेश वर्मा कार्यरत हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. स्वाति शुक्ला भी इस महाविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं। महाविद्यालय में एमआरआइ मशीन की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
इसके साथ ही, रुदौली तहसील के मांजनपुर में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी हो चुकी है, जिसका उद्घाटन हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। हालांकि, इस महाविद्यालय में आयुर्वेद की पढ़ाई शुरू होने में कम से कम दो वर्ष का समय लगेगा। पढ़ाई शुरू करने से पहले इसे चिकित्सालय के रूप में संचालित किया जाएगा। इस महाविद्यालय में पदों के सृजन और चिकित्सकों की नियुक्ति के उपरांत चिकित्सालय भी शीघ्र पूरी क्षमता से काम करेगा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह विष्णु ने बताया कि पदों के सृजन के लिए पत्रावली शासन को भेजी गई है। इस प्रकार, अयोध्या में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे विकास से यह स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब केवल धार्मिक नगरी नहीं रह गया है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बन गया है। यहाँ पर चिकित्सा की तीनों विधियों का समावेश होने से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस विकास से अयोध्या का भविष्य और भी उज्ज्वल नजर आ रहा है।



















