Education Crisis in Faridabad: फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 30% पद खाली

फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण मिड-डे-मील वर्करों को कक्षाएं सं
फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण मिड-डे-मील वर्करों को कक्षाएं संभालने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी अक्सर गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा दी जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हाल ही में 'दैनिक जागरण' द्वारा किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में लगी हुई है। कई स्कूलों में तो एक भी नियमित अध्यापक नहीं है, और डेप्युटेशन पर आए अध्यापक विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षण के स्तर को प्रभावित कर रही है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी बाधा उत्पन्न कर रही है।
चावला कालोनी स्थित राजकीय माॅडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला में विद्यार्थियों की संख्या 340 है, लेकिन यहां केवल 13 अध्यापक हैं, जिनमें से 10 की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगी हुई है। इस स्थिति में मिड-डे-मील वर्करों को बच्चों की कक्षाओं का संचालन करने के लिए मदद लेनी पड़ रही है। बल्लभगढ़ स्थित राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में 215 छात्राओं के लिए केवल 2 अध्यापक ही पढ़ाने के लिए बचे हैं। इसी तरह, सेक्टर-तीन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक भी नियमित अध्यापक नहीं है, और डेपुटेशन पर आए 11 अध्यापकों में से 3 की ड्यूटी अन्य कार्यों में लगी हुई है। ऐसे में 600 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल 8 अध्यापकों पर है।



















