Foreign Licensing Exam Challenges: एमबीबीएस के बाद भी छात्रों को क्यों नहीं मिल रहा मौका?

नई दिल्ली से एजुकेशन डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद हजारों छात्र विदेशी लाइसेंसिंग परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसका
नई दिल्ली से एजुकेशन डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद हजारों छात्र विदेशी लाइसेंसिंग परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जिन छात्रों ने अपने संस्थानों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, उन संस्थानों ने वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मेडिकल स्कूल्स में ECFMG स्पॉन्सर नोट की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। यह स्पॉन्सर नोट यह सुनिश्चित करता है कि संस्थान ECFMG के सभी मानकों को पूरा करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों की सूची तैयार करना है। जिन संस्थानों के पास यह स्पॉन्सर नोट होते हैं, उनके छात्र ECFMG सर्टिफिकेशन के लिए योग्य होते हैं। कॉलेज अपने पहले बैच के ग्रेजुएट के बाद या पहले बैच के एडमिशन के पांच साल बाद क्रेडेंशियल वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
अधिकतर मेडिकल कॉलेज यह प्रक्रिया तब शुरू करते हैं जब उनका कॉलेज पहले बैच के 12 महीने बाद मेडिकल इंटर्नशिप का संचालन करता है। लेकिन कई छात्रों को इस प्रक्रिया के बारे में तब पता चलता है जब वे एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके होते हैं। इस समय तक उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके कॉलेज के पास ECFMG स्पॉन्सर नोट्स नहीं हैं। जब छात्र USMLE, यूके के PLAB या अन्य लाइसेंसिंग परीक्षाओं में शामिल होते हैं, तब उन्हें यह अहसास होता है कि उनके संस्थान के पास विदेशी लाइसेंसिंग परीक्षा में शामिल होने के लिए आवश्यक स्पॉन्सर नोट्स नहीं हैं।



















