New Education Policy Impact: नई शिक्षा नीति का कमाल, पढ़ाने की उम्र में बीए-बीकॉम की रेगुलर पढ़ाई को भरा फॉर्म

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के लागू होने के बाद, शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। आमतौर पर, विद्यार्थी 25 वर्ष की उम्र तक स्नातक और
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के लागू होने के बाद, शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। आमतौर पर, विद्यार्थी 25 वर्ष की उम्र तक स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं, लेकिन अब यह सीमा बदल गई है। अब लोग 26 से 45 वर्ष की आयु में भी नियमित बीए और बीकॉम की पढ़ाई के लिए आवेदन कर रहे हैं। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान, 56 लोगों ने स्नातक प्रथम सेमेस्टर में दाखिले के लिए आवेदन किया है। इनमें से चार फार्म 45 वर्ष की आयु के लोगों ने भरे हैं। यह बदलाव शिक्षा के प्रति लोगों की सोच को दर्शाता है, जहां अब कोई भी व्यक्ति अपनी उम्र के बावजूद शिक्षा हासिल करने के लिए आगे आ रहा है।
इस नई नीति के तहत, स्नातक में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। पहले, यदि किसी छात्र ने इंटर के बाद स्नातक में प्रवेश लेने में कोई समय गंवाया, तो उसके अंकों में हर वर्ष 5 प्रतिशत की कटौती होती थी। लेकिन अब एनईपी के लागू होने से इस कटौती की व्यवस्था समाप्त हो गई है। इसका मतलब है कि अब कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र कितनी भी हो, नियमित स्नातक की पढ़ाई कर सकता है। इस बदलाव ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है, जिससे अधिक आयु के लोग भी अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे आ रहे हैं।


















