Reader Recruitment Case in Punjab and Haryana High Court: विवा में मनमाने अंक देने के आरोप पर 22 सितंबर तक मांगा जवाब

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में रीडर (लीगल) भर्ती-2025 की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाले दो अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है। पिंजोर न
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में रीडर (लीगल) भर्ती-2025 की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाले दो अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है। पिंजोर निवासी नीलम और अन्य ने आरोप लगाया है कि विवा वाइस में मनमाने तरीके से अत्यंत कम अंक देकर उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया, जबकि लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों में वे सभी आवश्यक योग्यता पूरी कर चुके थे। याचिकाकर्ताओं ने अंतिम चयन परिणाम के साथ-साथ उनकी आपत्तियों को खारिज करने वाले आदेशों को भी रद्द करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं के वकील डी एस रावत ने बेंच को बताया कि हाई कोर्ट ने 14 जुलाई 2025 को रीडर (लीगल) के 60 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें से 48 पद प्रत्यक्ष भर्ती और 12 विभागीय कोटे के थे। सामान्य वर्ग में प्रत्यक्ष भर्ती के 41 पद विज्ञापित किए गए थे। चयन प्रक्रिया में 250 अंकों की लिखित परीक्षा और 30 अंकों का विवा-वाइस निर्धारित किया गया था। नियमों के अनुसार, लिखित परीक्षा में अंग्रेजी में 50 प्रतिशत, अन्य दोनों प्रश्न पत्रों में 40 प्रतिशत तथा विवा में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने लिखित परीक्षा में क्रमशः 148 और 139.5 अंक प्राप्त किए और कंप्यूटर प्रवीणता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, लेकिन अंतिम परिणाम में विवा-वाइस में क्रमशः 9 और 8 अंक दिए गए, जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। उनका दावा है कि कुल 50 प्रतिशत से अधिक अंक होने के बावजूद केवल विवा में कम अंक देकर उन्हें चयन से वंचित किया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि साक्षात्कार में शामिल 39 अभ्यर्थियों में से किसी को भी औसत स्तर का नहीं माना गया। चयनित उम्मीदवारों को 27, 28 या 29 अंक दिए गए, जबकि अयोग्य घोषित अभ्यर्थियों को 7, 8 या 9 अंक देकर बाहर कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे चयन प्रक्रिया में पक्षपात और मनमानी का संकेत बताया है। उन्होंने आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि कई अभ्यर्थियों को विभिन्न मूल्यांकन मदों में समान अंक दिए गए, जिससे अंकांकन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जहां तक संभव हो साक्षात्कार की वीडियो रिकॉर्डिंग का सुझाव दिया है, लेकिन इस भर्ती में ऐसा नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से अंतिम चयन परिणाम निरस्त करने, विवा-वाइस दोबारा वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ कराने अथवा विशेष परिस्थितियों में विवा के न्यूनतम अंकों की शर्त में राहत देकर उनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने का निर्देश देने की मांग की है।

















