Oh My Dog Review: कंक्रीट के जंगलों में खोती इंसानियत को आईना दिखाती है ओह माय डॉग, बेजुबानों के दर्द की दिल छू लेने वाली कहानी

फिल्म 'ओह माय डॉग' एक ऐसी कहानी है जो हमें बचपन की मासूमियत और जानवरों के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाती है। इस फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है,
फिल्म 'ओह माय डॉग' एक ऐसी कहानी है जो हमें बचपन की मासूमियत और जानवरों के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाती है। इस फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है, जो OMG 2 के लिए भी जाने जाते हैं। फिल्म की शुरुआत मुंबई में एक श्वान को राजकीय सम्मान के साथ दी जाने वाली अंतिम विदाई से होती है। यह दृश्य दर्शकों को तुरंत प्रभावित करता है और फिल्म की गहराई का अहसास कराता है। इसके बाद कहानी असम के एक गांव की ओर बढ़ती है, जहां एक बच्चा, अपू (माही राय), अपने प्यारे कुत्ते मोमो के अचानक लापता होने से पूरी तरह टूट जाता है। अपू अपनी मां (गीत अग्रवाल शर्मा) के साथ थाने जाता है, लेकिन पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं लेती। इसके बाद अपू अपनी टीचर (सुलक्षणा बरुआ) के साथ मोमो की खोज में निकल पड़ता है।
दूसरी कहानी बिहार के पटना से जुड़ी है, जहां एक बाल मजदूर प्रिंस (निखिल कुमार) अचानक लापता हो जाता है। उसके वफादार आवारा कुत्ते ऑस्कर उसकी खोज में निकलता है। इस खोज में मास्टर जी (पंकज त्रिपाठी) भी शामिल हो जाते हैं, जो इन बच्चों को शिक्षा देने का काम करते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह सर्च मिशन डॉग मीट के भयावह रैकेट और मानव अंगों की तस्करी से जुड़ जाता है, जो दर्शकों को एक खौफनाक सच्चाई से रूबरू कराता है।



















