Venus Transit 2026: दैत्य गुरु शुक्र का गोचर, सावन आते ही इन 4 राशियों की बढ़ेगी मुश्किल

30 जुलाई से सावन का महीना शुरू होने जा रहा है। इसके अगले दिन, 1 अगस्त को, दैत्य और असुरों के गुरु शुक्र कन्या राशि में गोचर करेंगे, जो 2 सितंबर तक जारी रहेगा। ज
30 जुलाई से सावन का महीना शुरू होने जा रहा है। इसके अगले दिन, 1 अगस्त को, दैत्य और असुरों के गुरु शुक्र कन्या राशि में गोचर करेंगे, जो 2 सितंबर तक जारी रहेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि कन्या राशि शुक्र की नीच राशि मानी जाती है, और इस गोचर के दौरान चार राशियों के जातकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय लोगों को सलाह दी गई है कि वे सावन के पूरे महीने अपने स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों का ध्यान रखें। आइए जानते हैं कि शुक्र का यह गोचर किन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर छठे भाव में होगा, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस दौरान गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना आवश्यक होगा। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना भी लाभकारी रहेगा। किसी को उधार धन देने से बचना चाहिए और सोच-समझकर आर्थिक निर्णय लेने से संभावित परेशानियों को कम किया जा सकता है। वहीं, मिथुन राशि में शुक्र का गोचर चौथे भाव में रहेगा, जिससे पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है। घर का माहौल तनावपूर्ण रहने की संभावना है और माता की सेहत को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इस दौरान वाहन, घर, या संपत्ति से जुड़े निर्णयों में रुकावट आ सकती है, इसलिए धन के लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए।
तुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर 12वें भाव में होगा, जिससे अनावश्यक खर्चों में वृद्धि हो सकती है। अगले एक महीने बिना योजना के यात्रा करना भारी पड़ सकता है और धन हानि की स्थिति भी बन सकती है। रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं, इसलिए खर्च और संबंध दोनों मामलों में संतुलित व्यवहार अपनाना आवश्यक है। मीन राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर 7वें भाव में होने जा रहा है, जिसका प्रभाव दांपत्य जीवन और साझेदारी में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता को दर्शाता है। जीवनसाथी के साथ मतभेद उभर सकते हैं, इसलिए सभी आर्थिक फैसले स्पष्टता के साथ लेना बेहतर रहेगा। इस गोचर के दौरान बचाव के लिए उपाय भी बताए गए हैं, जैसे कि सावन के हर शुक्रवार मां लक्ष्मी को सफेद चीजों का भोग लगाना, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना, और 'ॐ शुं शुक्राय नमः' मंत्र का जाप करना।



















