Health Initiative: दादी मां का बटुआ' से सुधर रही सेहत, भारतरत्न नानाजी देशमुख की पहल से 200 गांवों में मात्र 2 रुपये में हो रहा इलाज

चित्रकूट के ग्रामीण क्षेत्रों में दादी मां का बटुआ अभियान स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह पहल भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीन दयाल
चित्रकूट के ग्रामीण क्षेत्रों में दादी मां का बटुआ अभियान स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह पहल भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीन दयाल शोध संस्थान (डीआरआइ) के अंतर्गत चल रही है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य को सशक्त बनाना है। इस अभियान के तहत लगभग 200 गांवों के लोगों को मात्र 2 रुपये में इलाज की सुविधा दी जा रही है। आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार हो रहा है। अभियान के तहत 33 प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां एक छोटे बटुए में रखी जाती हैं, जिन्हें स्थानीय जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तीकरण का भी प्रतीक बन रही है।
आरोग्यधाम के महाप्रबंधक डा. अनिल जायसवाल के अनुसार, दादी मां का बटुआ अभियान 1996 में शुरू हुआ था, जब 12 औषधियों वाली किट के साथ इसकी शुरुआत की गई थी। धीरे-धीरे इस योजना ने ग्रामीणों के बीच लोकप्रियता हासिल की और अब यह 200 गांवों तक पहुंच चुकी है। इस योजना के तहत गांव के समझदार प्रौढ़ों को सामान्य रोगों जैसे सिरदर्द, बुखार, सर्दी-जुकाम, पेट दर्द आदि के प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाता है। गंभीर रोगियों को आगे के उपचार के लिए आरोग्यधाम लाया जाता है। इस प्रकार, यह योजना न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है, बल्कि स्थानीय लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक भी कर रही है।



















