Bareilly's Historic Day: क्रांतिकारियों ने 9 अगस्त 1942 को कलेक्ट्रेट का रिकॉर्ड रूम जलाया

9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज बरेली में सुनाई दी, जिससे अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई। शहर में जगह-जगह जुलूस निकले, प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी और क
9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज बरेली में सुनाई दी, जिससे अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई। शहर में जगह-जगह जुलूस निकले, प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी और कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में आग लगाने की घटना ने ब्रिटिश अधिकारियों को चौंका दिया। बरेली के क्रांतिकारियों ने जेल और पुलिस की लाठियों की परवाह किए बिना आजादी की मशाल को जलाए रखा।
1857 की क्रांति से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक, बरेली की भूमिका आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 1942 में जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया, तो मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान से उठी इस क्रांति की ज्वाला बहुत जल्द बरेली पहुंच गई।
उस समय बरेली में स्वाधीनता संग्राम की अगुवाई सेठ दामोदर स्वरूप कर रहे थे। अंग्रेज सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डालना शुरू कर दिया। इसके बावजूद क्रांतिकारियों का हौसला नहीं टूटा। वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी की किताब 'बरेली एक कोलाज' के अनुसार, महात्मा गांधी की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही आंदोलन और उग्र हो गया। 10 अगस्त को सेठ दामोदर स्वरूप, धर्मदत्त वैद्य, पंडित दीनानाथ मिश्र, दरबारी लाल शर्मा, ऊधौनारायण मिश्र, चिरंजीव लाल गुप्त, ब्रजमोहन लाल शास्त्री, मोहनलाल युवशी और राममूर्ति सहित कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया। प्रतापचंद्र आजाद को पहले ही जेल भेजा जा चुका था।
अगस्त क्रांति के दौरान सबसे चर्चित घटना कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में आग लगाना रही। ताराचंद रस्तोगी, इकराम हुसैन और विश्वेश्वर दयाल मिश्र ने ब्रिटिश शासन के कामकाज को ठप करने के लिए कलेक्ट्रेट के सरकारी रिकॉर्ड को निशाना बनाया। गोरखा सिपाहियों की कड़ी सुरक्षा को चकमा देकर तीनों क्रांतिकारी परिसर में दाखिल हुए और रोशनदान के रास्ते अंदर तेल पहुंचाकर रिकॉर्ड रूम को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में क्रांतिकारियों की गुप्त मदद करने के आरोप में कलेक्ट्रेट कर्मचारी पीडी जोशी को भी गिरफ्तार किया गया।
















