








महाराष्ट्र में दूध की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। राज्य में दूध उत्पादक और प्रोसेसर्स की वेलफेयर एसोसिएशन ने गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमत में 2 रुपये प्रत
महाराष्ट्र में दूध की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। राज्य में दूध उत्पादक और प्रोसेसर्स की वेलफेयर एसोसिएशन ने गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का निर्णय लिया है। यह नई दरें 11 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि केवल दूध ही नहीं, बल्कि दही और पनीर जैसे अन्य डेयरी उत्पादों के दाम भी लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। कंपनियों का कहना है कि दूध की खरीद लागत, परिवहन के लिए ईंधन और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण यह निर्णय लेना आवश्यक हो गया।
महाराष्ट्र अकेला ऐसा राज्य नहीं है, जहां दूध की कीमतें बढ़ी हैं। पिछले वर्ष में देशभर में दूध की कीमतों में कई बार वृद्धि हो चुकी है, जिससे आम आदमी का बजट प्रभावित हो रहा है। 2026 के पहले आठ महीनों में, विभिन्न राज्यों में कम से कम 6-7 बार दूध महंगा हुआ है। सबसे बड़ा निर्णय 14 मई को लिया गया, जब देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने एक साथ दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए। इसके बाद पंजाब की वेरका, राजस्थान की सरस और बिहार की सुधा डेयरी ने भी इसी तरह की वृद्धि की। जून में केरल की मिल्मा ने सीधे 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की, और अब अगस्त में महाराष्ट्र की बारी आई है।
विश्लेषण के अनुसार, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि आने वाले महीनों में दूध की कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनियां यह वृद्धि एक बार में नहीं, बल्कि किस्तों में करेंगी ताकि उपभोक्ताओं पर एक साथ बोझ न पड़े। दूध के अलावा पनीर, घी और फ्लेवर्ड मिल्क जैसे उत्पादों की कीमतों में भी अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। क्रिसिल का यह भी कहना है कि चालू वित्त वर्ष में डेयरी उद्योग का कारोबार 13 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
डेयरी कंपनियों की रणनीति अब स्पष्ट हो गई है। कीमतों को धीरे-धीरे बढ़ाना ताकि उपभोक्ताओं को एक साथ बड़ा झटका न लगे। पिछले एक साल में विभिन्न महीनों में, विभिन्न राज्यों में 1 से 4 रुपये प्रति लीटर की छोटी-छोटी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और मवेशियों के लिए हरे चारे की बढ़ती लागत के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह सिलसिला जारी रह सकता है।
हालांकि, दाम बढ़ने के बावजूद किसानों और डेयरियों को राहत नहीं मिल रही है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में, अयोध्या दुग्ध संघ ने हाल ही में पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत 4 रुपये प्रति लीटर तक घटा दी है, जबकि पिछले एक साल में पशु आहार, चोकर और भूसे के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इस प्रकार, उपभोक्ता अधिक पैसे चुका रहा है, लेकिन किसान को पूरा लाभ नहीं मिल रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की गिरावट का खतरा भी बना हुआ है, जिससे आपूर्ति और मांग का संतुलन बिगड़ सकता है। कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में दूध और उससे बने उत्पादों की कीमतें आम आदमी की रसोई पर दबाव बनाए रखेंगी।
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