Bombay High Court releases Shiv Sena councillor with conditions: जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, हाई कोर्ट ने शिवसेना पार्षद को शर्त के साथ रिहा करने का दिया आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे को ज्यूडिशियल कस्टडी से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने उनके लिए कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे को ज्यूडिशियल कस्टडी से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने उनके लिए कई शर्तें भी निर्धारित की हैं। पार्षद पर कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम के एक अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कथित हमले का आरोप है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने म्हात्रे की जमानत पर पहले लगाई गई रोक को हटा दिया। अदालत ने आदेश दिया कि जब तक पुलिस इस मामले में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर देती, तब तक उन्हें महाराष्ट्र के बाहर रहना होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि जनता द्वारा और जनता के लिए होते हैं। यदि किसी प्रतिनिधि पर अपने मतदाताओं पर हमला करने का आरोप लगता है, तो यह लोकतंत्र की नींव को नुकसान पहुंचा सकता है। 14 जुलाई को सेशन कोर्ट ने पार्षद को जमानत दी थी, लेकिन बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत पर रोक लगा दी।
म्हात्रे ने 18 जुलाई को आत्मसमर्पण किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। हाई कोर्ट ने मामले की जांच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंप दी थी। म्हात्रे के वकील आबाद पोंडा ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष सुनवाई के लिए शर्तों का पालन करेंगे और महाराष्ट्र के बाहर अपने निवास का विवरण भी प्रस्तुत किया।

















