Court Ruling on Caste Dominance: इलाहाबाद HC ने प्रबंध समितियों में जातिगत वर्चस्व पर उठाए सवाल

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में फतेहपुर स्थित धाता इंटर कालेज की प्रबंध समिति के चुनाव विवाद पर सुनवाई करते हुए जातिगत और गुटीय वर्चस्व के मुद्दे पर गंभीर
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में फतेहपुर स्थित धाता इंटर कालेज की प्रबंध समिति के चुनाव विवाद पर सुनवाई करते हुए जातिगत और गुटीय वर्चस्व के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने यह टिप्पणी धनराज सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि राज्य से वित्तीय सहायता प्राप्त संस्थाओं का प्रबंधन किसी एक जाति समूह के हाथों में सिमटा रहना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 की भावना के खिलाफ है। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 जैसे औपनिवेशिक कानूनों में आज की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जिससे सार्वजनिक धन से संचालित संस्थाओं की निगरानी की जा सके।
कोर्ट ने मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा और रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स को तीन सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि क्या राज्य के पास ऐसी सोसाइटियों में समय पर चुनाव सुनिश्चित करने और जाति, धर्म तथा लिंग के आधार पर भेदभाव रोकने का कोई तंत्र मौजूद है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को यह सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है कि प्रदेश में कितनी सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाएं किसी एक जाति समूह के प्रभुत्व में चल रही हैं। इसमें स्थानीय थानाध्यक्ष और तहसीलदार से सहयोग लेने की भी बात कही गई है।

















