Court Ruling on Citizenship Documents: कलकत्ता हाई कोर्ट ने नागरिकता के प्रमाण पर स्पष्टता दी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि वोटर कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकत
कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि वोटर कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकते हैं। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब मुर्शिदाबाद के एक व्यक्ति की नागरिकता को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह होता है, तो इन दस्तावेजों के होने मात्र से उसे भारतीय नागरिक नहीं माना जा सकता है। यह निर्णय उस समय आया जब एक व्यक्ति को 'बांग्लादेशी' मानते हुए डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। अदालत ने राज्य की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति देबांग्शु बासक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने की। याचिका में कहा गया था कि नासिर और उसके चचेरे भाई सुमन मोल्ला को यह साबित करने के कई मौके दिए गए कि नासिर भारतीय नागरिक है। सुमन ने अदालत में दावा किया कि नासिर के पिता की मृत्यु 1980 में हुई थी और उसने नासिर का पालन-पोषण किया। हालांकि, अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया क्योंकि दस्तावेजों के अनुसार नासिर की उम्र सुमन से अधिक थी। इसके अलावा, याचिकाकर्ता और उसके गवाहों के बयानों में भी भारी विरोधाभास पाया गया। पुलिस पूछताछ में सुमन ने खुद को नासिर का चचेरा भाई बताया, जबकि अदालत में उसने खुद को चाचा बताया।


















