Court ruling on rape case: दुष्कर्म मामले में समझौता होने के बाद भी रद नहीं होगी FIR

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को आपसी समझौते के आधार पर समाप्त नहीं किया जा स
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को आपसी समझौते के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे अपराध केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं होते, बल्कि यह समाज के समग्र ताने-बाने पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यह निर्णय न्यायाधीश राकेश कैनथला की एकल पीठ द्वारा सुनाया गया, जिसमें उन्होंने अब्दुल वहाब व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई की। इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया था, और उसे कम दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी, जब सिरमौर जिले के पांवटा साहिब स्थित पुरुवाला पुलिस थाने में एक महिला ने प्राथमिकी दर्ज करवाई। पीड़िता का कहना था कि निकाह के बाद से ही उसे उसके जेठ द्वारा दुष्कर्म का प्रयास किया गया और उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 498ए, 506 और 376 के तहत मामला दर्ज किया। बाद में, समाज के कुछ सम्मानित लोगों की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया। पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
















