Deaths during sewer cleaning: सीवर सफाई के दौरान मौतों का सिलसिला जारी, 2019 से अब तक 500 से अधिक मौतें दर्ज

नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि जनवरी 2019 से लेकर जून 2026 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498
नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि जनवरी 2019 से लेकर जून 2026 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498 सफाई कर्मियों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रश्न के उत्तर में प्रस्तुत किया। सरकार का कहना है कि इन मौतों में से किसी भी मौत को मैनुअल स्कैवेंजिंग के कारण नहीं माना गया है। मैनुअल स्कैवेंजिंग का अर्थ है अस्वच्छ शौचालय, खुली नालियों, गड्ढों या रेलवे ट्रैक से मानव मल को हाथ से हटाना। जबकि सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई बिना सुरक्षा उपकरणों के की जाती है, जिसे खतरनाक सफाई के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसलिए इन मौतों को हैजर्डस क्लीनिंग में दर्ज किया गया है।
सरकार के अनुसार, 2024-25 में सभी जिलों में किए गए सर्वेक्षण में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला और सभी जिलों ने खुद को मैनुअल स्कैवेंजिंग मुक्त घोषित कर दिया है। यह स्थिति तब है जब 2013 और 2018 के सर्वेक्षण में 17 राज्यों में 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर पाए गए थे। इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश (32,473), महाराष्ट्र (6,325), उत्तराखंड (4,988) और असम (3,921) में थी। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मैनुअल स्कैवेंजिंग की समस्या कितनी गंभीर थी, लेकिन अब सरकार के दावों के अनुसार, यह समस्या समाप्त हो गई है।















