Air Quality Crisis: दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर नया विवाद, 165 दिन जहरीली हवा

दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर फिर से बहस छिड़ गई है। संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता से जुड़े
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर फिर से बहस छिड़ गई है। संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े पेश किए हैं। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राजधानी की हवा स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है, भले ही सरकार इसे सुधार के रूप में पेश कर रही हो। राज्यसभा में डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई के सवाल पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 6 अगस्त 2026 को लिखित जवाब दिया। इस जवाब में कहा गया कि 2025 में दिल्ली में एक भी दिन हवा की गुणवत्ता गुड यानी शून्य से 50 के एक्यूआई दायरे में दर्ज नहीं हुई। इसके विपरीत, साल के 365 दिनों में से 79 दिन सैटिस्फैक्टरी, 121 दिन मॉडरेट, 86 दिन पुअर, 71 दिन वेरी पुअर और 8 दिन सीवियर श्रेणी में दर्ज हुए। इस प्रकार, 200 दिन हवा का स्तर ठीक है लेकिन 165 दिन वह जहरीली रही है।
सरकार ने अपने जवाब में तर्क किया है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण गाड़ियों, उद्योगों, निर्माण-तोड़फोड़ की धूल, कूड़ा जलाने और खासकर सर्दियों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होता है। अक्टूबर-नवंबर में पंजाब, हरियाणा और यूपी के एनसीआर जिलों में पराली जलाने से भी हालात बिगड़ते हैं। 2021 में बने एयर क्वालिटी कमीशन (CAQM) ने अब तक 101 स्टैचुटरी डायरेक्शन और 17 एडवाइजरी जारी की हैं। सरकार का दावा है कि हालात 2016 के मुकाबले बेहतर हुए हैं, जब गुड दिन की संख्या केवल 110 थी, जो अब 200 हो गई है। वहीं, वेरी पुअर दिन 99 से घटकर 71 और सीवियर दिन 25 से घटकर 8 रह गए हैं।
















