Highway construction issues: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पीएनसी के निदेशकों पर CBI का केस

आगरा से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के धंसने के मामले में पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ
आगरा से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के धंसने के मामले में पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी है। एनएचएआइ ने पीएनसी को नान-परफोर्मर घोषित करते हुए उस पर परफोर्मेंस सिक्योरिटी का दो प्रतिशत अर्थदंड भी लगाया है। यह पहली बार नहीं है जब पीएनसी का नाम विवादों में आया है। इससे पहले, वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश के छतरपुर में एनएचएआइ अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले में भी कंपनी का नाम सामने आया था। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने पीएनसी के निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआइ ने 2024 में आठ जून को झांसी-खजुराहो हाईवे प्रोजेक्ट के निदेशक पुरुषोत्तम लाल चौधरी समेत 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसमें पीएनसी के दो निदेशक भी शामिल थे। सीबीआइ ने रिश्वत की रकम के साथ एनएचएआइ के अधिकारियों, रेजीडेंट इंजीनियर और पीएनसी के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।
सीबीआइ ने आगरा, गया, छतरपुर, लखनऊ, कानपुर, आगरा और गुरुग्राम में पीएनसी के ठिकानों पर छापे मारे थे। पीएनसी के निदेशकों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कर्मचारियों के साथ मिलकर षड्यंत्र किया था। लखनऊ एक्सप्रेसवे के आगरा से फिरोजाबाद के बीच 56 किमी लंबे रोड का निर्माण भी पीएनसी ने किया था, जो छह माह में ही धंस गया। इसके अलावा, न्यू दक्षिणी बाइपास का निर्माण भी पीएनसी ने किया है, जो कई बार धंस चुका है। यह स्थिति पीएनसी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे कंपनी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
















