Gen Z's Voice on the Streets: संसद और विधानसभा में युवा क्यों हैं हाशिए पर?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सड़कों, सोशल मीडिया और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में जनरेशन जेड, जिसे हम gen z के नाम से जानते हैं, की आवाज़ सबसे अधिक सुनाई देती है। ले
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सड़कों, सोशल मीडिया और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में जनरेशन जेड, जिसे हम Gen Z के नाम से जानते हैं, की आवाज़ सबसे अधिक सुनाई देती है। लेकिन जब बात आती है देश की संसद और राज्य विधानसभाओं की, तो यह आवाज़ काफी कमजोर नजर आती है। देश की कुल जनसंख्या में Gen Z का हिस्सा एक चौथाई से भी अधिक है, फिर भी संसद में उनके केवल 6 सांसद और राज्य विधानसभाओं में 20 विधायक हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जनरेशन जेड की राजनीतिक भागीदारी कितनी सीमित है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 2026 में भारत की जनसंख्या 142.6 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें Gen Z की संख्या 36.74 करोड़ यानी 25.8 प्रतिशत है। हालांकि, इनमें से केवल 8.9 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो चुनाव लड़ने की योग्य उम्र में हैं।
2024 का लोकसभा चुनाव Gen Z के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन इस चुनाव में 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 98 Gen Z के थे, जो कि कुल का महज 1.2 प्रतिशत है। इनमें से भी केवल 6 उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाए। दिलचस्प बात यह है कि इन 6 में से 4 महिलाएं हैं, जो विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आती हैं। इनमें से अधिकांश बड़े राजनीतिक परिवारों से हैं, जबकि केवल संजना जाटव ही एक गैर-राजनीतिक परिवार से हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए Gen Z को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
















