Job Struggle in Jharkhand: 20 साल से नौकरी की तलाश में बैठे JPSC छात्र का दर्द

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (jpsc) और जेएसएससी (jssc) में हुई धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे राहुल क्रांति कुमार का दर्द सुनकर हर कोई है
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) में हुई धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे राहुल क्रांति कुमार का दर्द सुनकर हर कोई हैरान है। उनकी उम्र अब 40 साल होने जा रही है और उन्होंने 2011 में बीएड किया था। पिछले 20 साल से वे सिर्फ एक सरकारी नौकरी की आस में तैयारी कर रहे हैं। राहुल ने बताया कि हाई स्कूल टीजीटी परीक्षा में उनके 172 नंबर आए, लेकिन 152 नंबर वाले का सिलेक्शन हो गया। यह सिर्फ एक व्यक्ति का गुस्सा नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पोल खोलता है। राहुल का कहना है कि जब कम नंबर वाले का सिलेक्शन हुआ तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया, लेकिन JSSC ने उन्हें नौकरी देने के बजाय मामला डबल बेंच में भेज दिया। यह सवाल उठता है कि एक आम छात्र सरकार से कैसे लड़े? उन्होंने परीक्षा प्रणाली के बड़े पैटर्न पर भी सवाल उठाया।
राहुल एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और घर में कोई बड़ा आर्थिक सहारा नहीं था। उन्होंने 20 साल की उम्र से नौकरी की तैयारी शुरू की थी, लेकिन अब 40 साल की उम्र में भी उनके हाथ में एक स्थायी नौकरी नहीं है। उन्होंने 33 साल की उम्र में शादी की, लेकिन अब बच्चों को ट्यूशन और कोचिंग पढ़ाकर किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं। राहुल ने बताया कि जब सहायक आचार्य परीक्षा में 26,000 पदों का विज्ञापन आया था, तब नियुक्ति पत्र किस्तों में बांटे जा रहे हैं। कभी 2000, कभी 3000 तो कभी 500 लोगों को नियुक्ति दी जाती है। अभी भी 4,000 पद खाली हैं जबकि अभ्यर्थी क्वालीफाई हैं।
















