Justice Liberhan Passes Away: बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस लिब्रहान का निधन

जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। जस्टिस लिबरहान उन न्यायाधीशों में से एक थे जिन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की
जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। जस्टिस लिबरहान उन न्यायाधीशों में से एक थे जिन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता की थी। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद ने बताया कि जस्टिस लिबरहान का निधन रविवार को हुआ। उनके निधन की खबर ने कानूनी जगत में शोक की लहर दौड़ा दी है। जस्टिस लिबरहान का नाम बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के कारण देशभर में जाना जाता है। 16 दिसंबर 1992 को उन्हें इस एक सदस्यीय जांच आयोग का प्रमुख बनाया गया था। इस आयोग का उद्देश्य अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना के पीछे की परिस्थितियों की जांच करना था। यह मामला देश के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच मामलों में से एक माना जाता है। उनके निधन से कानूनी समुदाय में गहरा दुख है।
जस्टिस लिबरहान ने अपने वकालत के करियर की शुरुआत 1964 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से की थी। इसके बाद अगस्त 1970 में उन्हें पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के लिए चुना गया और 11 फरवरी 1987 तक इस पद पर बने रहे। जनवरी 1976 से जून 1983 तक उन्होंने बार काउंसिल के सचिव के रूप में भी कार्य किया। 11 फरवरी 1987 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया। उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब 7 जुलाई 1997 को उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। इसके बाद 28 फरवरी 1998 को वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उनके योगदान को कानूनी जगत में हमेशा याद रखा जाएगा।
















