Neem Coated Urea Production Increased by 8.25%: कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने उठाए कदम

देश में नीम कोटेड यूरिया (ncu) की पैदावार में 8.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कालाबाजारी और गैर-कृषि उपयोग के लिए अवैध डायवर्जन की समस्या अभी भी बनी हुई है।
देश में नीम कोटेड यूरिया (NCU) की पैदावार में 8.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कालाबाजारी और गैर-कृषि उपयोग के लिए अवैध डायवर्जन की समस्या अभी भी बनी हुई है। संसद में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2015 से सभी घरेलू उत्पादकों और आयातकों के लिए 100 प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया की आपूर्ति अनिवार्य कर दी गई थी। इसके परिणामस्वरूप पिछले वर्षों में इसकी पैदावार बढ़ी है। हालाँकि, कालाबाजारी की शिकायतें भी आई हैं। सरकार ने अप्रैल 2026 से अब तक 2,868 लाइसेंस रद्द किए हैं।
नीम कोटेड यूरिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह धीरे-धीरे घुलता है, जिससे सामान्य यूरिया की तुलना में इसका उपयोग कम होता है और फसल में नाइट्रोजन का अवशोषण बेहतर होता है। शोध के अनुसार, NCU के उपयोग से पैदावार में औसतन 8.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि नाइट्रोजन के नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत की कमी आई है। NCU एक प्रभावी नाइट्रिफिकेशन इनहिबिटर की तरह काम करता है, जिससे मिट्टी में अमोनियम नाइट्रोजन का स्तर बढ़ता है।
सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखी है। अप्रैल 2026 से अब तक देशभर में 1,69,031 छापे मारे गए हैं, जिनमें 9,127 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 270 मामलों में FIR दर्ज की गई है। डायवर्जन के मामलों में 414 कारण बताओ नोटिस और 46 FIR दर्ज की गई हैं। यह दर्शाता है कि समस्या अभी भी गंभीर है। सरकार ने पिछले तीन वर्षों का राज्यवार उत्पादन डेटा भी प्रस्तुत किया। 2025-26 में कुल 293.2 लाख मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने 89.4 LMT उत्पादन किया, जबकि गुजरात में 36.8 LMT, राजस्थान में 37.7 LMT, महाराष्ट्र में 21.1 LMT और मध्य प्रदेश में 19.7 LMT उत्पादन हुआ। अन्य राज्यों में भी उत्पादन दर्ज किया गया है, लेकिन आंध्र प्रदेश का उत्पादन घटकर लगभग शून्य हो गया है।
















