Opposition Parties Distance from Congress Agenda: कांग्रेस के एजेंडे से विपक्षी दलों ने क्यों बनाई दूरी?

नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार को विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों के बीच एकता की कमी
नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार को विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों के बीच एकता की कमी और कांग्रेस के साथ उनके रिश्तों में खटास ने इस सत्र को और भी जटिल बना दिया है। पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर चर्चा के लिए विपक्ष का एकजुट होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके बावजूद अन्य मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। कांग्रेस, जो कि सदन में आक्रामकता के साथ अपनी बात रख रही है, को सहयोगी दलों का उतना समर्थन नहीं मिल रहा है, जितना कि उसे अपेक्षित था। यह स्थिति दर्शाती है कि विपक्षी दलों के बीच आपसी संबंधों में दरारें आ गई हैं।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन के उफान के समय हुई। इस मुद्दे को उठाना स्वाभाविक था और विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि, इस दौरान आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विपक्षी दलों के बीच एकता की कमी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भी खटास देखने को मिली, लेकिन यह खिंचाव ज्यादा समय तक नहीं चला। इसके बावजूद, जब सदन में पेपर लीक पर चर्चा हुई, तो कांग्रेस को यह महसूस हुआ कि उसके एजेंडे को लेकर अन्य विपक्षी दलों का समर्थन नहीं मिल रहा है।
















