Political Showdown in Shimla: शिमला जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर आज रात सियासी पहरा

शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को होने वाली बैठक में कांग्रेस और भाजपा दोनों दल अपने-अपने समर्थित स
शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को होने वाली बैठक में कांग्रेस और भाजपा दोनों दल अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस चुनाव में निर्दलीय सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, भाजपा के पास 12 सदस्यों का समर्थन है, जबकि कांग्रेस के पास 11 सदस्य हैं। जिला परिषद में बहुमत के लिए 13 सदस्यों की आवश्यकता है, इसलिए दोनों दलों की नजरें निर्दलीय सदस्यों पर टिकी हुई हैं। अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए दोनों दल जोड़-तोड़ और रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में दिनभर बैठकों और संपर्क अभियानों का दौर जारी है।
जिला परिषद की सत्ता हासिल करने के लिए पिछले तीन महीनों से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों दल लगातार अपने समर्थित सदस्यों के संपर्क में हैं और किसी भी तरह की टूट-फूट रोकने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले दोनों खेमे अपने-अपने सदस्यों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों निर्दलीय सदस्य एक ही दल के पक्ष में जाते हैं, तो जिला परिषद का सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। सोमवार सुबह जिला उपायुक्त कार्यालय के बचत भवन में चुनाव होना है, और ऐसे में दोनों दलों के सदस्य निर्दलीय के साथ-साथ अपने सदस्यों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
















