Response to Violence: आइसा अध्यक्ष बोलीं- भाषा को मुद्दा बना पैलेट गन के सवालों से क्यों बच रही सरकार?

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस घटना के बा
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस घटना के बाद वामपंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा ने कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर माफी मांगने या उसकी निंदा करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस विवाद को जानबूझकर उछालकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। नेहा ने जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी और उन्होंने इस दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर भाषा के विवाद को प्रमुखता देकर पेलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस की कार्रवाई की जवाबदेही से बच रही है।
नेहा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार इस तरह के मुद्दों को उठाकर असली सवालों से ध्यान हटा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। नेहा का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से लोकतंत्र को खतरा है और यह सरकार की असली मंशा को दर्शाता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है और कहा है कि वे अपने मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे।















