Supreme Court's Warning: CBI Investigation on Builders Will Continue

सुप्रीम कोर्ट ने उन बिल्डर्स की कोशिशों पर रोक लगा दी है जो कुछ घर खरीदारों से समझौता करके cbi जांच से बचना चाहते थे। cji सूर्य कांत की बेंच ने स्पष्ट रूप से कह
सुप्रीम कोर्ट ने उन बिल्डर्स की कोशिशों पर रोक लगा दी है जो कुछ घर खरीदारों से समझौता करके CBI जांच से बचना चाहते थे। CJI सूर्य कांत की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक अंतिम फ्लैट खरीदार को उसकी प्रॉपर्टी या रिफंड नहीं मिल जाता, तब तक घर खरीदारों से धोखाधड़ी और जमा पैसे के गलत इस्तेमाल के लिए बिल्डर्स की जांच जारी रहेगी। यह मामला उन प्रोजेक्ट्स से संबंधित है, जहां बिल्डर्स ने सबवेंशन स्कीम के तहत बैंकों से पैसा लिया, लेकिन फ्लैट बनाने में भारी देरी की। इसके बावजूद बैंक खरीदारों से EMI वसूल कर रहे थे। CBI की तरफ से ASG ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज 50 FIR में से 18 की जांच पूरी हो चुकी है। 17 चार्जशीट और 1 क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। चार्जशीट में SBI, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, HDFC और ICICI के कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं। CBI ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी बिल्डर्स के साथ मिलीभगत में थे। एजेंसी ने इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया है और मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को 2 हफ्ते के भीतर मंजूरी देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर बैंकों ने दो हफ्ते में मंजूरी नहीं दी, तो उन्हें कोर्ट में स्पष्टीकरण देना होगा। साथ ही, CBI से कहा गया कि PMLA के तहत जांच के लिए मनी ट्रेल के दस्तावेज ED के साथ साझा करे। बेंच ने CBI को ओजोन ग्रुप- कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु विवांशा - बेंगलुरु; रुद्रा बिल्डवेल - ग्रेटर नोएडा; ओमैक्स ग्रुप - चंडीगढ़ जैसी कंपनियों की गहन जांच का आदेश दिया है। इन पर आरोप है कि इनके पास जमीन का मालिकाना हक नहीं था, फिर भी उन्होंने खुद को मालिक बताकर घर खरीदारों और बैंकों से समझौते किए। CBI ने कहा कि काम का बोझ ज्यादा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पंजाब के डीजीपी को 10 दिनों के भीतर CBI के लिए अतिरिक्त कर्मचारी डेप्युटेशन पर भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि घर खरीदारों को न्याय मिलना ही चाहिए, चाहे बिल्डर कितना भी समझौता कर ले।
















