Pension Account Verification Delayed: चढ़ावा चोरी मामले में सुभाष के खाते की धनराशि का नहीं हो सका सत्यापन

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के पेंशन खाते का सत्यापन एक बार फिर से मामले के निस्तारण में बाधा ब
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के पेंशन खाते का सत्यापन एक बार फिर से मामले के निस्तारण में बाधा बन गया है। इस मामले में पुलिस सुभाष के खाते में आई बड़ी धनराशि, जिसमें पांच-पांच लाख रुपये शामिल हैं, के स्रोत की वैधानिक पुष्टि के लिए सत्यापन करवा रही है। गुरुवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा के न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन और आरोपित के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने न्यायालय को बताया कि संबंधित धनराशि के विषय में बैंक से सत्यापन के बाद ही आगे की कार्यवाही की जा सकेगी। इस पर न्यायालय ने अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त निर्धारित की है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष को अगली तिथि तक बैंक से सत्यापन प्राप्त कर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
इस मामले में अभियोजन ने 3 अगस्त को एक आख्या प्रस्तुत की थी, जिसमें सात बिंदुओं के आधार पर कहा गया था कि सुभाष श्रीवास्तव के खाते में आई संदिग्ध राशि के स्रोतों को लेकर बैंक से पत्राचार किया गया है। इस पत्राचार के परिणामस्वरूप अभी तक कोई आख्या प्राप्त नहीं हुई है। इसके अलावा, 30 जुलाई को सुभाष ने अपने पेंशन खाते की पूरी धनराशि का हिसाब न्यायालय में पेश किया था। अभियोजन ने 25 जून के बाद की राशि को अवमुक्त करने पर अपनी अनापत्ति पहले ही न्यायालय में प्रस्तुत कर दी थी। इस प्रकार, मामले में आगे की कार्यवाही के लिए बैंक से सत्यापन की आवश्यकता बनी हुई है।
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ चल रहे इस मामले में न्यायालय की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। अभियोजन पक्ष को अब बैंक से सत्यापन प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे ताकि मामले का निस्तारण समय पर हो सके। इस मामले में न्यायालय की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी, जहां अभियोजन को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक और अवसर मिलेगा। इस प्रकार, चढ़ावा चोरी के इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही और अभियोजन की तैयारी दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, ताकि न्यायालय को सही जानकारी मिल सके और उचित निर्णय लिया जा सके।
















