Supreme Court's strict action in Ghaziabad rape-murder case: गाजियाबाद रेप-हत्या केस में SC की सख्ती, अस्पताल देंगे 12 लाख मुआवजा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दो प्राइवेट अस्पताल मुआवजा देने के लिए सह
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दो प्राइवेट अस्पताल मुआवजा देने के लिए सहमत हो गए हैं। एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देगा, जबकि दूसरे अस्पताल ने 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है। इन अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने बच्ची को समय पर इलाज नहीं दिया, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। यह मुआवजा चार हफ्तों के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दिया जाएगा।
बच्ची के साथ बेरहमी से रेप किया गया था और आरोप है कि समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण उसकी जान चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने निर्णय में कहा कि वह यौन उत्पीड़न और अन्य मेडिकल इमरजेंसी के पीड़ितों के लिए तुरंत इलाज की गाइडलाइंस बनाएगा। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की।
इस मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची के रेप और हत्या की जांच के लिए विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया था। साथ ही, उत्तर प्रदेश प्रशासन के रवैये और अस्पतालों द्वारा बच्ची को भर्ती करने और इलाज से इनकार करने पर चिंता जताई थी। जब सुप्रीम कोर्ट मुआवजे के भुगतान के निर्देश पर विचार कर रही थी, तब अस्पतालों ने अपनी मर्जी से मुआवजा देने को सहमति दी।
24 अप्रैल को पीड़िता के पिता ने स्थानीय पुलिस पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया था और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में SIT का गठन करने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची को दो अस्पतालों में ले जाया गया था, लेकिन उन्हें आपातकालीन चिकित्सा सहायता नहीं दी गई। पुलिस की लापरवाही के बारे में भी उन्होंने बताया कि एफआईआर में केवल हत्या का मामला दर्ज किया गया था, जबकि रेप का मामला नहीं था।
















