Supreme Court's Order on Mining: अरावली में अवैध माइनिंग पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए अरावली प्लांटेशन एरिया में चल रही सभी मौजूदा माइनिंग लीज रद्द करने का आदेश दिया। अदाल
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए अरावली प्लांटेशन एरिया में चल रही सभी मौजूदा माइनिंग लीज रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने इसे इको-सेंसिटिव जोन के रूप में मान्यता दी और माइनिंग माफिया के साथ अधिकारियों की मिलीभगत का भी उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले पर हैरानी जताई, जिसमें प्लांटेशन एरिया में माइनिंग की अनुमति दी गई थी। बेंच ने स्पष्ट किया कि अरावली प्लांटेशन एरिया प्राकृतिक ढाल का कार्य करता है, और यहां माइनिंग की अनुमति देने से 44 हजार पेड़ कट सकते हैं। अदालत ने कहा कि माइनिंग माफिया से मिलीभगत करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों ने ही इन क्षेत्रों में लीज दी हैं। अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि वह लीज रद्द कर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे।
यह क्षेत्र फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और मेवात- NCR के 6 जिलों के 360 गांवों में फैला हुआ है। यूरोपीय संघ के फंड से चल रहे एक प्रोजेक्ट के तहत यहां फॉरेस्ट इकोसिस्टम को पुनर्स्थापित करने का कार्य चल रहा था। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि दिसंबर 2015 में पूरे अरावली हिल्स और रेंज में माइनिंग पर रोक लगाई जा चुकी है। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर अरावली में कोई माइनिंग गतिविधि पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
















