Supreme Court's Hearing on Protest Locations: नागरिकों की समस्या गंभीर विषय, जंतर-मंतर का विकल्प खोजने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली का जंतर मंतर अब धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली का जंतर मंतर अब धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है। याचिका में यह दावा किया गया है कि यहां होने वाले प्रदर्शनों के कारण आसपास के निवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और आवश्यक सेवाओं में भी बाधा उत्पन्न होती है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। याचिका को सतीश चंद कौशिक द्वारा दायर किया गया था, जिसमें उन्होंने जंतर मंतर के स्थान पर किसी अन्य उपयुक्त स्थान की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ जस्टिस, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया और कहा कि जंतर मंतर अब प्रदर्शनों के लिए सही स्थान नहीं रह गया है। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे इस मामले में सरकार से आवश्यक जानकारी लेकर आएं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले को अलग से सूचीबद्ध किया जाए ताकि इसे समय पर सुना जा सके। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों के कारण स्थानीय निवासियों को आने-जाने में कठिनाई होती है और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।















