UCO Bank Fraud Case: 25 साल पुराने मामले में तीन पूर्व निदेशक दोषी, बैंक अधिकारी बरी

नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक 25 वर्ष पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में राउज एवेन्यू स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने द्वारकाधीश स्पिनर्स लिमिटेड (डीएसए
नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक 25 वर्ष पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में राउज एवेन्यू स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने द्वारकाधीश स्पिनर्स लिमिटेड (डीएसएल) के तीन पूर्व निदेशकों को दोषी ठहराया है। अदालत ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि आरोपितों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यूको बैंक से 7 करोड़ रुपये का ऋण हासिल किया और इसके बाद धनराशि का दुरुपयोग किया। इस मामले में बैंक के तत्कालीन अधिकारी बिकाश बसु को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि उन्होंने किसी साजिश में भाग लिया या अवैध लाभ प्राप्त किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऋण की संस्तुति केवल बसु ने नहीं की थी, बल्कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रस्ताव का मूल्यांकन किया था। ऐसे में केवल उन्हें जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा। दोषी ठहराए गए तीनों आरोपितों की सजा पर अदालत बाद में सुनवाई करेगी।
विशेष सीबीआइ न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने अमित चतुर्वेदी, संजय चतुर्वेदी और परवीन जुनेजा को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने का दोषी पाया। अदालत ने कहा कि बैंक के साथ बाद में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) कर लेने से आरोपित आपराधिक दायित्व से मुक्त नहीं हो सकते। सीबीआइ के अनुसार, वर्ष 2001 में यूको बैंक की संसद मार्ग शाखा से 7 करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए कंपनी के निदेशकों ने शुरुआत में दावा किया था कि राशि का उपयोग आइएफसीआइ के पुराने ऋण के प्री-पेमेंट के लिए किया जाएगा। ऋण स्वीकृत होने के बाद आरोपितों ने बैंक को बताया कि आइएफसीआई ने प्री-पेमेंट स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है और फिर ऋण को केंद्र सरकार की टेक्नोलाजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (टीयूएफएस) के तहत मशीनरी खरीद के लिए परिवर्तित करा लिया।
















