Supreme Court rejects compensation reduction: सेवानिवृत्ति के आधार पर मुआवजा घटाना सुप्रीम कोर्ट को मंजूर नहीं, हाईकोर्ट का आदेश निरस्त

जेएनएन, जबलपुर। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के मोहगांव निवासी उद्यान अधिकारी विश्राम सिंह के परिवार को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने
जेएनएन, जबलपुर। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के मोहगांव निवासी उद्यान अधिकारी विश्राम सिंह के परिवार को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि को कम करना उचित नहीं है। यह मामला उस समय का है जब विश्राम सिंह एक सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे थे। घटना 7 मार्च 2018 को हुई थी, जब वे मोटरसाइकिल से यात्रा कर रहे थे। इस दौरान एक कार चालक ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इस दुर्घटना में शामिल वाहन, बीमा, चालक की लापरवाही और विश्राम सिंह की मृत्यु के तथ्य विवादित नहीं रहे। सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित परिवार ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं में क्षतिपूर्ति को कम आंका जाने को अनुचित ठहराया।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, एमएसीटी, जबलपुर ने विश्राम सिंह के परिवार को 36 लाख 59 हजार 839 रुपये की क्षतिपूर्ति दी थी। लेकिन बीमा कंपनी ने इस निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की गणना करते हुए इसे 72 लाख 6 हजार 186 रुपये निर्धारित किया। हालांकि, पारिवारिक पेंशन को आय में शामिल करते हुए और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में न रखते हुए, हाई कोर्ट ने क्षतिपूर्ति राशि को 52 लाख 16 हजार 377 रुपये तक सीमित कर दिया। इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, जहां न्यायालय ने सरला वर्मा और प्रणय सेठी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसमें सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के कारण मुआवजा कम किया जा सके।
















